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एयर गैप के पार तीन रास्ते: QR कोड, Bluetooth LE और NFC

एयर गैप तभी काम का है जब आप उसका इस्तेमाल करते रहें। हर सिग्नेचर के लिए एक रिक्वेस्ट को एक तरफ जाना होता है और सिग्नेचर को वापस आना होता है, और इसका माध्यम उस पल के हिसाब से होना चाहिए।

एक लैपटॉप और एक फोन, जिनके बीच तीन कड़ियाँ हैं: ऑप्टिकल QR लिंक, Bluetooth तरंगें और NFC टैप
एक सेशन, तीन माध्यम।
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तीन क्यों

हर एयर-गैप्ड (air-gapped) वॉलेट QR कोड से शुरू होता है, और इसकी अच्छी वजहें हैं। वे ऑप्टिकल हैं। आप उन्हें देख सकते हैं। कैमरे को बहला-फुसलाकर कुछ वापस भिजवाया नहीं जा सकता। AirNox का पहला साइनर (signer) सिर्फ QR पर चलता था, और उससे हमने एक सबक सीखा। फोन को मॉनिटर की तरफ कीजिए, फ्रेम्स का इंतज़ार कीजिए, वेबकैम को फोन की तरफ कीजिए, फिर इंतज़ार कीजिए। हर सिग्नेचर पर दो बार। महीने में एक ट्रांसफर के लिए यह ठीक है। लेकिन जिस सेशन में एक अप्रूवल, एक स्वैप, एक डिपॉज़िट और एक क्लेम हो, उसमें लोग शॉर्टकट ढूँढ़ने लगते हैं, और शॉर्टकट आते ही सुरक्षित तरीका वह नहीं रह जाता जिसे लोग असल में इस्तेमाल करते हैं।

सुविधा, सुरक्षा का उल्टा नहीं है। सुविधा ही तय करती है कि लोग सुरक्षित विकल्प का इस्तेमाल करते रहेंगे या नहीं। इसलिए AirNox आपको तीन माध्यम देता है और चुनने देता है।

QR कोड, Bluetooth LE और NFC की तुलना करते तीन कार्ड: पहुँच, एक सिग्नेचर में क्या लगता है, और हर एक किस काम के लिए अच्छा है
हालात देखकर चुनिए, भरोसा देखकर नहीं। इन तीनों में से किसी पर भी अकेले भरोसा नहीं किया जाता।

QR कोड

डेस्कटॉप एक कोड दिखाता है और फोन उसे स्कैन करता है। फोन एक कोड दिखाता है और वेबकैम उसे पढ़ता है। लंबी रिक्वेस्ट, जैसे कोई कॉन्ट्रैक्ट कॉल, कोड के एक एनिमेटेड सीक्वेंस के रूप में चलती है, और प्रोग्रेस दोनों स्क्रीन पर दिखती है।

एक लैपटॉप पर एनिमेटेड QR कोड और एक फोन पर उसका जवाब, दोनों स्कैन पर नंबर लगे हैं
हर सिग्नेचर पर दो स्कैन।

यह सख्त एयर गैप है। रोशनी के सिवा कुछ भी पार नहीं जाता। पहली पेयरिंग (pairing), कभी-कभार होने वाले बड़े ट्रांसफर और ऐसे कमरों के लिए जहाँ रेडियो बंद रहने चाहिए, यही सही विकल्प है। यह हमेशा फॉलबैक के रूप में भी मौजूद रहता है। अगर आप शुद्धतावादी तरीका चाहते हैं, तो QR पर ही रहिए, और इस लेख की बाकी कोई बात आप पर लागू नहीं होती।

Bluetooth Low Energy

यह डेस्क वाला माध्यम है। फोन कीबोर्ड के पास रखा रहता है। रिक्वेस्ट आती है, आप फोन की स्क्रीन पढ़ते हैं, Accept (स्वीकार) दबाते हैं। पहली पेयरिंग के बाद फोन को किसी चीज़ की तरफ करके पकड़ना नहीं पड़ता।

फोन पेरिफेरल की तरह काम करता है और कम ट्रांसमिट पावर पर सिग्नल भेजता है, इसलिए डिज़ाइन के हिसाब से इसकी पहुँच डेस्क तक ही है। यह कभी दूसरे डिवाइस स्कैन नहीं करता, इसीलिए ऐप को लोकेशन परमिशन की ज़रूरत नहीं पड़ती। कम पावर का मकसद प्राइवेसी और छोटा अटैक सरफेस है। ट्रैफिक को गोपनीय रखने का काम उसका नहीं है। यह काम सेशन का है, जिसके बारे में आगे के लेख बताते हैं।

Bluetooth LE रोज़ के इस्तेमाल के लिए है: dApp सेशन, लगातार कई सिग्नेचर, और हर वह काम जिसमें फोन हाथ की पहुँच में रहता है।

NFC

एक टैप। फोन डेस्कटॉप से जुड़े छोटे USB रीडर को छूता है, और टैप के दौरान रिक्वेस्ट पार चली जाती है। पहुँच कुछ सेंटीमीटर की है, और यह भौतिकी तय करती है। इस माध्यम के लिए अलग से कोई पेयरिंग स्क्रीन नहीं है। यह इशारा इरादा ज़ाहिर करता है, ठीक वैसे ही जैसे टर्मिनल पर कार्ड टैप करना। इसीलिए NFC टर्मिनल, कियोस्क और शेयर्ड डेस्क के लिए स्वाभाविक रूप से फिट बैठता है, जहाँ हर सिग्नेचर के लिए जानबूझकर किया गया एक फिज़िकल एक्शन ठीक वही है जो आप चाहते हैं।

NFC को रीडर चाहिए। QR कोड और Bluetooth LE को फोन और कंप्यूटर के अलावा कुछ नहीं चाहिए।

एक सेशन, तीन माध्यम

आप कोई भी माध्यम इस्तेमाल करें, उस पर एक ही चीज़ चलती है: डेस्कटॉप और फोन के बीच एंड-टू-एंड (end-to-end) एन्क्रिप्टेड, दोनों तरफ से ऑथेंटिकेटेड (mutual authentication) सेशन। आप एक बार पेयर करते हैं, एक QR स्कैन से और दोनों स्क्रीन पर एक छोटा कोड मिलाकर। उसके बाद माध्यम बस माध्यम है। आप दोबारा पेयर किए बिना इनके बीच स्विच कर सकते हैं, और सेशन को फर्क नहीं पड़ता कि वह रोशनी पर सवार है, रेडियो पर या टैप पर।

माध्यम पर भरोसा नहीं किया जाता। Bluetooth पेयरिंग, NFC की नज़दीकी और दिखता हुआ QR कोड ऑथेंटिकेशन नहीं हैं। ऑथेंटिकेशन सेशन है। यही बँटवारा हमें सुरक्षा का स्तर घटाए बिना सुविधा देने देता है, और यही उस लेख का विषय है जिसमें बताया गया है कि ट्रांसपोर्ट पर कभी भरोसा क्यों नहीं किया जाता।

कैसे चुनें

पहली पेयरिंग: QR। कभी-कभार, बड़े, सावधानी वाले ट्रांसफर: QR। डेस्क पर रोज़ का काम: Bluetooth LE। ऐसा टर्मिनल या कियोस्क जहाँ हर सिग्नेचर एक दिखने वाला, फिज़िकल एक्शन होना चाहिए: NFC। ऐसा कमरा जहाँ रेडियो की इजाज़त नहीं: फिर से QR। फोन और वॉलेट को कोई फर्क नहीं पड़ता। जो फिट हो, वही इस्तेमाल कीजिए।

पूरी सीरीज़

  1. मानकर चलिए कि कंप्यूटर हैक हो चुका है
  2. Mass Adoption Security: साइनर वह फोन है जो आपके पास पहले से है
  3. एयर गैप के पार तीन रास्ते: QR कोड, Bluetooth LE और NFC
  4. हवा में अदृश्य: ऐसा साइनर जिसे कोई स्कैन करके नहीं ढूँढ़ सकता
  5. ट्रांसपोर्ट पर कभी भरोसा नहीं किया जाता
  6. फोन आपको क्या दिखाता है: साइनर पर ट्रांज़ैक्शन का विश्लेषण
  7. फोन अपना रिकॉर्ड खुद रखता है
  8. आपके डेस्कटॉप पर वॉल्ट: Argon2id और अंदाज़ों के आगे टिकने वाली प्रोफाइल
  9. ब्राउज़र वॉलेट के बिना dApps
  10. नियमों वाला MCP सर्वर: AI एजेंट लिमिट के दायरे में
  11. सब कामों के लिए एक सुरक्षित वॉलेट
  12. छोटा और नेटिव: C++, बिना JavaScript रनटाइम, वर्कस्टेशन से Raspberry Pi तक

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